मिथिला पेंटिंगक किछु वर्णन

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मधुबनी चित्रकला मिथिलांचलक क्षेत्र जेना बिहारके दरभंगा, मधुबनी आओर नेपालक किछ क्षेत्रमेँ प्रमुख चित्रकला अछि।प्रारम्भ में रंगोली के रूप मेँ रहै बला बाद में ई आधुनिक रूपमेँ कपड़ा,दीवार आओर कागज पर सेहो उतैर आईल।मिथिला के औरत सभ द्वारा शुरू कैल गेल अइ घरेलू चित्रकला के पुरूष सेहो अपना लेलखिन ।वर्तमानमेँ मिथिला पेंटिंगक कलाकार सभ अंतरास्ट्रीय स्तर पर मधुबनी व मिथिला पेंटिंग केर सम्मान आओर बढ़ावै के लेल 10000 sq/ft में मधुबनी रेलवे स्टेशनक देवाल पर मिथिला पेंटिंग के कलाकृति सभसँ शोभित कैल गेल अछि। ई पहल निशुल्क अर्थात श्रमदान के रूप में कैल गेल।श्रमदानक रूप मेँ कैल गेल ई अदभुत कलाकृति विदेशी पर्यटक आओर सेनानी सभकेँ खूब पंसद आबैत छैन।

मानल जै ये कि चित्र राजा जनक राम-सीताक विवाहक दौरान महिला कलाकार सभसँ बनओलन्हि।पहिले त सिर्फ ऊंच जाति के महिला के ई कला बनबै के इजाजत छलैन मुदा समय के संगे सिमा सेहो ख़तम भ गेल।आई मिथिलांचल के कतेक गांव के महिला ई कला मेँ दक्ष छैथ।अपन असल रूप में त ई पेंटिंग गाँवक मैट स लेपल गेल झोपड़ी पर देखै लेल भेटै छलै।मुदा आब एकरा कपड़ा आओर कागज के कैनवास पर बनाओल जाइत छै।समय के संगे संगे अइ विधा मेँ पासवान जाति के लोक सभ राजा सलहेसक जीवनक विरतान्त वर्णण करअ लगलखिन्ह।अइ समुदाय के लोक सभ राजा सलहेस के देवता के रूप में पुजै छथिन।