पितृपक्ष अथवा पितर पख

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पितृ पक्ष पंद्रह दिनक ओ अवधि(पक्ष/पख) अछि जाहिमें हिन्दू लोक सभ अपन पितर के श्रद्धापूर्वक स्मरण करैत आओर हुनका पिण्डदान करैत छथिन।एकरा सोलह श्राद्ध ,महालय पक्ष ,अपर पक्ष आदि नाम सँ सेहो जानल जाइत छैक। गीता जीक अध्याय९ श्लोक२५ के अनुसार पितर पुजै वाला पितर सभकेँ ,देव पुजै वला देवता सभकेँ आओर परमात्मा पुजै वला परमात्मा सभकेँ प्राप्त होइ छथिन्ह।
अर्थात मनुष्य के हुनके पूजा करबाक लेल कहल जाइत छैन जिनका पाबै लेल चाहैत छथिन्ह।अर्थात समझदार के लेल इशारा समझ सकै छैथ की परमात्मा के प्राप्त केनाइ ये श्रेष्ठ अछि।अतः अन्य पूजा छोइड़ कअ सिर्फ परमात्मा केर पूजा करू।

अनुयायी:- हिंदू

प्रकार :-हिन्दू

उत्सव:-15 दिन

अनुष्ठान:- श्राद्ध

पितर सभकेँ श्रद्धापूर्वक स्मरण आरंभ भद्रप्रद के पूर्णिमा सँ सवरप्रित अमावास्या

 

 

हिन्दू धर्मक मार्केंडेय पुराण(गीता प्रेस गोरखपुर से प्रकाशित पेज 237 पर अइछ)
मेँ सेहो श्राद्ध के विषय मेँ एकटा कथा के वर्णन मिलै छै जइमे एकटा रुचि नामक ब्रम्हचारी साधक वेद केर अनुसार साधना कअ रहल छलाह
जहन ओ 40 वर्षक भेलाह तहन हुनकर 4 पूर्वज जे मनमाना आचरण अ शास्त्र विरुद्ध साधना करि क पितर बैन गेल रहथिन आओर कष्ट भोगैत देखाई देलखिन,पितर सभ हुनका कहलखिन की बेटा रुचि शादी करवाक हमर श्रद्ध निकालल करअ ,हम दुखी भ रहल छि।अइ पर रुचि ऋषि कहलखिन जे पित्रमहो वेदमें क्रिया या कर्म कांड मार्ग के मुर्खक साधना कहल गेल।फेर आहाँ हमरा कियाक ओइ गलत राह पर लगा रहल छी।अइ पर पितर सभ कहलखिन्ह कि बेटा आहाँक बात सत्य अछि की वेद में पितर पूजा,भूत पूजा संगे संगे देवी देवता केर पूजा के सेहो अविधा कहल गेल ऎछि।