दूरसंचार क्षेत्र समस्या सँ ग्रसित, डेटा आ वॉइस कॉल भ’ सकैत अछि महँग।

हिन्दू मुस्लिम आओर राष्ट्रवाद केर पिआओल जा रहल निशा केर बीच एकटा महत्वपूर्ण समाद मीडिया केर हेडलाइन नहि बनि सकल, जे जनता लेल आगू आबय बला समयमे फिरेसानीक सबब बनि सकैत अछि। राष्ट्रवाद केर निशामे मातल राष्ट्रीय मिडियाके इ खबरि जनबाक फुरसत कहाँ छैक जे आमलोकके सङ्ग की होमय जा रहल छै। दूरसंचार क्षेत्र संकट केर दौर सँ गुजरि रहल अछि। जिओ एबाक बाद ओनाहुँ बहुत रास कंपनी अपन बिजनेस समेटि लेलकै अथवा दिवालिया हेबाक प्रोसीजरमे चलि रहलि अछि। हँ उपभोक्ताके फ्री कॉल आ सस्ता डेटा केर सुविधा भेटलै। मुदा इ सुविधा जल्दिये जनता सँ छीनबाक तैयारी भ’ रहल छै। सस्ता कॉल आओर डेटा होमय सँ ओहिना दूरसंचार कंपनी केर राजस्व कम भ’ गेल, आओर सुप्रीम कोर्ट द्वारा ए जी आर केर नव परिभाषा तय करबाक सँ दूरसंचार कंपनी केर सामने नव समस्या ठाढ़ भ’ गेल छै। बात इ छै जे 2005 सँ दूरसंचार कंपनी आओर सरकार केर बीच ए जी आर यानी एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यु (adjusted gross revenue) केर परिभाषा पर विवाद चलैत रहय, जाहिमे कंपनी केर कहब रहय जे ए जी आर मे खाली दूरसंचार सँ संबंधित आयके मात्र शामिल कयल जेबाक चाही जखन की सरकार दूरसंचार सेवा सहित आन ठाम सँ प्राप्त राजस्व शामिल करबाक सेहो जोर देलकै। इ विवाद वर्तमान केंद्र सरकारमे बेसी जोर पकड़लक आओर विवाद कोर्ट गेलय आ कोर्ट केर आदेशानुसार आब दूरसंचार कंपनीके सरकारक परिभाषा मानय पड़तय सङ्गे 2005 सँ अखनि धरि केर बकाया 1.4 लाख करोड़ सरकारके सुदि आओर जुर्माना सङ्गहि देबय पड़तैक। सरकारके इ कंपनी सभ अपन ए जी आर केर 8 प्रतिशत लाइसेंस फी केर रूप मे आ 3 सँ 5 प्रतिशत स्पेक्ट्रम शुक्ल केर रूप मे देबय पड़ैत छै। सरकार लेल बेसी ए जी आर मतलब बेसी आमदनी ।

सवाल इ छै जे दूरसंचार क्षेत्रक बेसी कंपनी पहिने अपन झोरा झपटा समेटि लेने अछि तँ सभटा भार एयरटेल , आईडिया, आओर जिओ पर जेतैक। जिओ 2016 सँ अपन बिजनेस सुरु केलकय तैं ओकरा मात्र दु सालक पाय दिये पड़तैक मुदा बाकी दुनु कंपनी 15 सालक पाय देतैक। इ कंपनी सरकार सँ डेटा शुल्क आ कालिंग पर चार्ज फिक्स्ड करय लेल कहैत छै मुदा सरकार एकर जिम्मेदारी ट्राईके देने अछि। अहि बीच आईडिया/वोडाफोन के अपन बिजनेस खत्म करबाक बात आबि रहल छै तखन मार्किटमे मात्र दु टा प्लेयर बचत एयरटेल आओर जिओ । कम कंपनी रहय सँ अहि कंपनी केर मोनोपोली रहतय आओर कॉल तथा डेटा अपन मनमर्जी सँ बढ़ा देतैक। अन्तमे नोकसान उपभोक्ताके हेतैक

लेखक इमेल: mayanand90@gmail.com
लेेखक नाओ: राजन

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